क्या है गठिया(Gout)?

क्या है गठिया?

गठिया को हम आम भाषा में “जोड़ो का दर्द” कहते है। दरअसल मेडिकल भाषा में जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड इकठ्ठा होने लगता है तब वह गठिया कहलाता है। इसके साथ ही जोड़ों में दर्द, अकड़न, सूजन, गांठ और शूल चुभने जैसी पीड़ा उत्पन होने लगती है।

Gout

अर्थराइटिस के प्रकार

  • रूमेटॉयड अर्थराइटिस: यह बहुत अधिक पाया जाने वाला गठिया का गंभीर रूप है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उपास्थि (ऊतक जोड़ों को एक साथ जोड़ती है) पर हमला करती है।
  • सोराइटिक अर्थराइटिस: अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप प्रायः सोरायसिस नामक त्वचा संक्रमण के कारण होता है जो  समय पर इलाज न होने पर काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।
  • ओस्टियोसोराइसिस: यह बीमारी आनुवांशिक हो सकता है जो नसों और अस्थिरज्जु, उपास्थि और जोड़ो की अंतर्निहित हड्डियों पर बुरा प्रभाव डालता है। । यह उम्र बीतने के साथ प्रकट होता है। यह बीमारी अक्सर  शरीर का भार सहन करने वाले अंगों जैसे पीठ, कमर, घुटना, रीढ़, अंगूठे का जोड़ और पैर की अंगुलियों को प्रभावित करता है।
  • पोलिमायलगिया रूमेटिका: यह गठिया का प्रकार अक्सर 50 साल की आयु पार कर चुके लोगों में होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय पीड़ा होने के साथ साथ इन अंगों को घुमाने में कठिनाई होती है।
  • एनकायलाजिंग स्पोंडिलाइटिस: यह सामान्यत: पीठ और शरीर के निचले हिस्से के जोड़ों को प्रभावित करती है। इसमें दर्द हल्‍का होता है लेकिन लगातार बना रहता है।
  • गाउट या गांठ: जब जोड़ों में मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल समाप्‍त हो जाता है तब वह गांठ वाली गठिया का रूप ले लेता है। इस बीमारी में भोजन में बदलाव जरुरी होता है और कुछ दवाओं की सहायता से कुछ दिन में आराम हो जाता है ।
  • सिडडोगाउट: यह रूमेटायड और गाउट से मिलता जुलता गठिया का प्रकार है जिसमे जोडों में कैल्शियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल जमा हो जाते है।
  • सिस्टेमिक लयूपस अर्थिमेटोसस: यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है जो जोड़ों के साथ साथ त्वचा और अन्य अंगों को प्रभावित करती है। यह बच्चे पैदा करने वाली उम्र में महिलाओं को होती है।

गठिया के लक्षण

  • जोड़ों में दर्द या अकड़न
  • जोड़ों में सूजन या फुलाव
  • चलने-फिरने या हिलने-डुलने में परेशानी
  • प्राय शुरुआत में ये लक्षण घुटनों, नितंबों, उंगलियों तथा मेरू की हड्डियों दिखते है
  • समय से इलाज न होने पर कलाइयों, कोहनियों, कंधों तथा टखनों के जोड़ों में भी ये लक्षण दिखाई पड़ने लगते है

गठिया के कारक

  • महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी
  • शरीर में आयरन की अधिकता
  • शरीर में कैल्सियम की अधिकता
  • पोषण की कमी
  • मोटापा
  • संक्रमण
  • ज्‍यादा शराब पीना
  • हाई ब्‍लड प्रेशर
  • किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करना
  • वंशानुगत

गठिया का उपचार कैसे करे?

  • गठिया के उचित उपचार के लिए चिकित्सक से जरुर परामर्श ले। चिकित्सक आपका रक्त परीक्षण और एक्स-रे करा सकते है। चिकित्सक द्वारा निर्देशित दवाइयां का नियमित रूप से सेवन करे।
  • शारीरिक वजन पर नियंत्रण रखें।
  • पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  • चिकित्सक द्वारा निर्देशित व्यायाम या योग नियमित रूप से करें।
  • समुचित विश्राम करें।
  • आप हलकी मालिश भी कर सकते है।
  • आप हीटिंग पैड और आईस पैक का भी प्रयोग कर जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से बच सकते हैं।
  • आप एक्यूपंक्चर का भी सहारा ले सकते है। इस चिकित्सा में त्वचा के प्रभावित बिंदुओं पर शुद्ध सुइयों को चुभो कर गठिया के दर्द को ठीक करा जाता है।

गलसुआ(Mumps) -लक्षण ,इलाज एवम् रोकथाम के उपाय

गलगण्ड रोग  (Mumps):-यह एक  विषाणुजनित रोग है जो पैरोटिड नामक लार ग्रंथि में संक्रमण से होता है जिससे  पैरोटिड ग्रंथियों के आकार में  कष्टदायक रूप  वृद्धि हो जाती  है। ये ग्रंथियां आगे तथा कान के नीचे स्थित होती हैं तथा लार  का उत्पादन करती हैं।

Mumps

रोग का विस्तार :-

गलगण्ड एक संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को एक विषाणु के कारण होता है , यह विषाणु संक्रमित लार से सम्पर्क के द्वारा फैलता है। 2 से 12 वर्ष के बीच के बच्चों में संक्रमण की सबसे अधिक सम्भावना होती है।

अधिक उम्र के लोगों में, पैरोटिड ग्रंथि के अलावा, अन्य ग्रंथियां जैसे अण्डकोष, पैन्क्रियाज (अग्न्याशय) एवं स्नायु प्रणाली भी शामिल हो सकती हैं। बीमारी के विकसित होने का काल, यानि शुरुआत से लक्षण पूर्ण रूप से विकसित होने तक, 12 से 24 दिन होता है।

बीमारी के लक्षण

  1. पैरोटिड ग्रंथि में कष्टदायक सूजन आ जाती है, जो कि शुरुआत में एक ओर होती है तथा 3 से 5 दिनों में दोनों ग्रंथियों में हो जाती है। ग्रंथि की सूजन 7 से 10 दिनों में कम हो जाती है।
  2. चबाने तथा निगलने के दौरान दर्द बढ़ जाता है, एवं लार के उत्पादन में वृद्धि करने वाले खट्टे खाद्य पदार्थ एवं रस इस दर्द को और बढ़ा देते हैं।
  3. सिरदर्द होने तथा भूख कम लगने के साथ तेज़ बुखार होता है। बुखार सामान्यतः 3 से 4 दिनों में नीचे आ जाता है
  4. जब तक ग्रंथि में सूजन रहती है, ( 7 से 10 दिनों)तब  तक, पीड़ित बच्चों से अन्य व्यक्ति में भी रोग फैल सकता है। इस दौरान उसे दूसरे बच्चों से दूर रखना चाहिए एवं स्कूल जाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
  5. पुरुषों में अंडकोषों में दर्द एवं सूजन (ऑर्काइटिस) हो सकती है।
  6. गलगण्ड से मस्तिष्क में सूजन (एंसिफेलाइटिस) भी हो सकती है।

डॉक्टर से तुरंत सम्पर्क किया जाना चाहिए, यदि ये लक्षण हों:

  1. तीव्र सिरदर्द
  2. गर्दन में जकड़न
  3. नींद के झोंके
  4. मुर्छा आना
  5. उलटी होने पर
  6. अत्यधिक तापमान
  7. पेट दर्द
  8. अंडकोषों में सूजन

उपचार

गलगण्ड के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। दवाइयों से विभिन्न लक्षणों में आराम मिल सकता है। आमतौर पर एंटिबायोटिक्स नहीं दी जाती हैं। बुखार को पैरासिटमॉल जैसी दवाइयों से नियंत्रित किया जाता है जो दर्द से भी राहत देती हैं। बच्चों को एस्पिरिन नहीं दी जानी चाहिए। प्रचुरता में तरल पदार्थों के साथ नर्म, हल्का आहार लेना आसान होता है। खट्टे पदार्थों एवं रसों से बचा जाना चाहिए। गलगण्ड से पीड़ित बच्चे को पूरे समय बिस्तर पर आराम करना आवश्यक नहीं है।

बचाव

गलसुआ वैक्सीन – गलगण्ड होने के बाद, व्यक्ति को कभी यह बीमारी नहीं होती है तथा उसका संक्रमण जीवन भर के लिए रोग के प्रति इम्युनिटी प्रदान कर देता है। जिन बच्चों को गलगण्ड नहीं हुआ हो, उनके इससे बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं। एमएमआर टीका तीन वाइरल बीमारियों– मीज़ल्स, मम्प्स एवं रुबेला (गलगण्ड, खसरा एवं हल्का खसरा) बीमारी से  सुरक्षा प्रदान करता है। यह सभी बच्चों को 15 माह की आयु में दिया जाना चाहिए। यह टीका एक साल से छोटे बच्चे को नहीं दिया जाना चाहिए और न ही बुखार से पीड़ित बच्चे तथा गर्भवती महिला को दी जानी चाहिए।

समस्याएं(Complication)

गलगण्ड कभी-कभी मस्तिष्क में संक्रमण कर सकता है (एंसिफेलाइटिस) जो कि गम्भीर स्थिति है। यदि पुरुषों में अण्डकोष प्रभावित होते हैं तो इसका परिणाम बांझपन हो सकता है।

रोजाना सुबह टहलने के फायदे

रोजाना सुबह टहलने के फायदे 

दैनिक रूप  से रोजाना सुबह टहलने के  बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ होते हैं । इससे  आप अच्छा  तो महसूस करते  ही हैं साथ ही  आपको अच्छा दिखने में भी मदद मिलती है।

1. दैनिक सैर से दिल मजबूत और स्वस्थ रहता है।

रोजाना टहलने से हृदय रोगों के होने की संभावना को काफी कम किया जा सकता है।

एक रिसर्च में पाया गया की  रजोनिवृति (मीनोपॉज प्राप्त)  महिलाएं  जो हर दिन एक मील चलती है  उनकी  तुलना में जो महिलाएं केवल रोजमर्रा के कार्य ही करती थी, उनमें हृदय रोगों की 82 प्रतिशत अधिक  संभावनाएं पायी गई। रोज 10 हजार कदम चलना चाहिये क्योंकि ये आपके हृदय पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और आपको कई प्रकार के रोगों से भी बचाता है।

2. जोड़ो के  दर्द छुटकारा मिलता है.

रोजाना 30 से 60 मिनट तक टहलने से  प्राकृतिक रूप से गठिये के दर्द को कम करने में सहायता मिलती  है। रोजाना टहलने से आपके जोड़ों की सूजन व कठोरता से भी राहत मिलती है। जब आप टहलना  शुरू करते हैं तो धीमी गति से शुरुवात करे  और धीरे-धीरे तेजी से व लम्बे समय तक टहलने  का प्रयास करें।

3. वजन नियंत्रण और  टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) की रोकथाम में मदद करता है.

दैनिक चलने से आप धीरे-धीरे अतिरिक्त वजन को कम करने में सक्षम होंगे। यदि आप रोजाना अच्छी तरह से 30 से 45 मिनट तक चलते हैं तो आपको  टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है . मधुमेह की रोकथाम के लिए  एक स्वस्थ आहार के साथ साथ व्यायाम भी काफी जरूरी है।

4. हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है.

टहलना आपकी मांसपेशियों को सक्रीय रखने का  सबसे शानदार तरीका है, विशेष रूप से आपके पैरों और बाहों की मांसपेशियों के लिए। ओस्टियोब्लास्ट आपकी हड्डियों की वे कोशिकायें हैं जो नई हड्डियों का निर्माण करती है। ये अतिरिक्त तनाव के लिए अच्छी तरह प्रतिक्रिया करते हैं।  सैर ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है।

5. उच्च रक्त रोकथाम में मदद मिलती है ।

दैनिक रूप से चलना उच्च रक्तचाप को स्वाभाविक ढंग से कम करता है। एक अध्ययन में यह पाया गया है कि एक 10 मिनट की तेज चाल उच्च रक्तचाप को कम करने में  काफी फायदेमंद हो सकती है ।सुबह सुबह 10 मिनट ,लंच के समय 10 मिनट टहलें और शाम को 10 मिनट तक टहलिये।

6. सैर करने से तनाव कम होता है।

मानसिक तनाव आज बहुत सारे व्यस्त लोगों की जिन्दगी में परेशानी बन गया है।व्यस्त लोगों की जिन्दगी में ऐसी बहुत सी चीजें होती हैं जिनसे उन्हें रोजाना निपटना होता है और पूरे दिन बस यहीं सब चलता रहता है।अनुसंधान से पता चला है कि रोजाना एक 20 से 30 मिनट की चाल, काफी हद तक मानसिक तनाव को कम करती है। यह एक औषधि की तरह काम करती है।

7. फेफड़ों की कार्यशीलता को बढ़ाती है और  अस्थमा व श्वसन रोगो से छूटकारा मिलता  है।

जिन लोगों के अस्थमा है उन लोगों के लिए भी व्यायाम एक अच्छी चीज है ,सुबह की सैर अस्थमा रोगीयों के लिए एक बेहतर विकल्प है। इसे धीरे धीरे शुरू किया जा सकता है और जैसे ही आप सहज महसूस करें आप इसे थोड़ा तेज कर सकते हैं। यह आपके वायुमार्गो को खोलेगा जिससे आपको सांस लेने में आसानी होगी।

चलने की आदत आपके फेफड़ों को मजबूत करेगी और अपके सांस लेने में सुधार करने और अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करेगी । अस्थमा रोगीयों के फेफड़ें ठण्डी हवा या गर्म हवा और वातावरण की अन्य चीजों के प्रति अधिक सवेंदनशील होते है।

8. मोटापा कम करने में मदद करता है।

मोटापा दुनिया में वर्तमान समय में एक महामारी का रूप ले लिया जिससे के काफी लोग ग्रसित है इसका कारण व्यायाम न करना है। ज्यादातर लोग अपने काम के दौरान सारा दिन बैठे ही रहते हैं ।लेकिन अगर आप समय निकालकर 30 से 40 मिनट तक सैर करते हैं तो एक महीने में आपका बहुत सारा मोटापा कम हो जायेगा। मोटापा एक ऐसी बीमारी है जो अपने साथ दूसरी खतरनाक बीमारीयों को भी न्योता देता है।

अगर आप अपनी खाने की आदतों को नहीं भी सुधारते हैं तो भी एक दैनिक सैर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और यह आपके शरीर से काफी केलोरी को खर्च करता है, इससे आपका जीवनकाल भी बढेगा।

9. आपके मस्तिष्क के लिए अच्छा है।

व्यायाम मस्तिष्क को स्मृति और स्पष्ट रूप से सोचने की क्षमता बढाने में मदद करता है। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित एरोबिक  व्यायाम मस्तिष्क में  हिप्पोकैम्पस के आकार को बढ़ा देता है।हिप्पोकैम्पस, आपके दिमाग का वह हिस्सा होता है जो सीखने तथा स्मृति की प्रक्रिया में शामिल होता है। 45 मिनट तक तेजी से चलना एक व्यायाम की तरह काम करता है जिससे आपके शरीर को काफी आक्सीजन मिलती है।

10. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है।

रोजाना घूमने से आपके शरीर की  रोग प्रतिरक्षा शक्ति बढ जाती है। हाल ही के अध्ययनों से पता चला है कि रोजाना सैर पर जाने से आपके शरीर  होने वाले बुखारों की संख्या काफी हद तक कम हो जाती है। डॉक्टरों का मानना है कि नियमित व्यायाम करनें से आपके शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बढ जाती है. इससे आपके शरीर की कोशिकाएं भी मजबूत बनती है जिससे किसी भी प्रकार का जीवाणु आपके शरीर में घुस नही पाता। इसलिए आपको नियमित रूप से सुबह सुबह घूमना चाहिये।

11. रचनात्मकता में वृद्धि।

अगर आप रोज सैर करते हैं तो आपकी रचनात्मक शक्ति बढेगी। यह न केवल आपके शरीर को गति प्रदान करता है बल्कि आपके दिमाग की क्रियाशीलता को भी जगाता है। रोजाना सैर से आपके शरीर से कोर्टिसोल जो आपके मूड व तनाव से जुड़ा होता है ,नामक हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है। उचित व्यायाम से आपके महसूस करने के तरीके में सुधार होगा। इससे आप अपने जीवन में सकारात्मक भाव से सोचेंगे।

12. रक्त के लिपिड (कोलेस्ट्रॉल) स्तर में सुधार करता है।

व्यायाम उन एंजाइमों की क्रियाशीलता को बढ़ा देता  है जो एलडीएल (बुरा कोलेस्ट्रॉल) को रक्त से और यकृत से बाहर निकालने में मदद करते हैं।

13. केंसर के खतरे को कम करता है।

अनुसंधानों से पता चला है कि शारीरिक व्यायाम केंसर के खतरे को काफी हद तक कम करता हैं। व्यायाम से महिलाओं में स्तन केंसर का खतरा कम होता है।व्यायाम करने से खाने की नली का केंसर, यकृत कैंसर होने की संभावनाएं भी घट जाती है। व्यायाम उन हार्मोनों का स्तर कम कर देता है जो केंसर का खतरा बढाते हैं। व्यायाम आपकी पाचन शक्ति को बढाता है जिससे पेट व बड़ी आंत के केंसर का खतरा भी कम होता है।

14. निंद्रा संबंधी विकार दूर करने में मदद करता है

जो लोग रोजाना व्यायाम करते हैं उनमें नींद की समस्या कम होती है। मध्यम व्यायाम जैसे रोजाना टहलना, नींद के विभिन्न चरणों के बीच शांत संक्रमण की अनुमति देकर नींद की गुणवता में सुधार लाता है। सुबह और दोपहर के व्यायाम नींद के लिए बेहतर माने जाते  हैं। सोने के पूर्व हल्का व्यायाम आपको नींद की सबसे गहरी अवस्था में लाने और लंबे समय तक सोये रहने में मदद करता है।

Acidity or Acid reflux or Heartburn/

Acidity or Acid reflux or Heartburn

एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स एक बहुत ही सामान्य स्थिति है   जो मुख्य रूप से पेट या छाती (सीने) में जलन पैदा करती है , आमतौर पर जलन छाती के निचले हिस्से के आसपास महसूस होती है l पेट में अम्लीय पदार्थों का खाने की नली में आ जाना एसिडिटी का मुख्य कारण होता है l पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड नामक अम्ल होता है यह भोजन को  टुकड़ों में तोड़ देता है और बैक्टीरिया जैसे रोगजन से बचाता है l पेट की अंदरूनी परत शक्तिशाली होती है जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के प्रति अनुकूल होती है मगर एसोफगास परतें इस अम्ल के प्रति अनुकूल नहीं होती इसलिए इसमें जलन महसूस होने लगती है l बार बार एसिडिटी की समस्या को GERD कहा जाता है l

एसिडिटी के लक्षण:-

  1. सीने में जलन:- यह ग्रास नली में एक जलन जैसी महसूस होती है  और झुकने पर और बदतर हो जाती है l यह कुछ घंटों तक लगातार हो सकती है और भोजन करने के बाद बढ़ जाती है l सीने में जलन दर्द गर्दन जा गले के अंदर तक भी महसूस होने लगता हैl कई बार पेट का अम्लीय  पदार्थ गले तक भी वापस आ जाता है जिससे जलन के साथ साथ मुंह और गले का स्वाद भी बिगड़ जाता है l
  2. अत्यधिक डकार आना और मुंह का स्वाद कड़वा पड़ना या उल्टी और पेट फूलना l
  3. लगातार सूखी खांसी आना घरघराहट,गले की समस्याएं जैसे कि गले में खराश होना या आवाज भारी होना l
  4. गले में लंबे समय से दर्द, निगलने में कठिनाई , छाती और पेट में दर्द l
  5. पेट की एसिडिटी के कारण दांतों की परत को नुकसान हो सकता है
  6. सांसो में बदबू, काला मल या मल में खून, लगातार हिचकी आना बिना किसी कारण के वजन घटना l

डॉक्टर के पास कब जाएं :- निम्न परिस्थितियां होने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए l

  1. अगर एसिडिटी या  पेट में जलन की समस्या अधिक गंभीर हो और बार-बार होने लगती है l
  2. निगलने में  कठिनाई या दर्द महसूस होना खासकर ठोस भोजन या गोलियां आदि निगलने में l
  3. अगर आपका वजन तेजी से घट रहा हो जिसके कारण का पता ना हो l
  4. अगर आपको काफी समय से गले में दर्द   है या गले में घुटन जैसा महसूस होता है l
  5. अगर आप दो हफ्तों से भी ज्यादा समय से एंटी एसिड दवाई ले रहे हैं लेकिन एसिडिटी की समस्या अभी भी बनी हुई है l
  6. अगर आप का स्वर बैठ गया है घरघराहट महसूस हो रही है या आपको  अस्थमा और गंभीर हो गया है तो डॉक्टर को दिखाएं l
  7. अगर आपकी बेचैनी आपकी रोजाना की जीवन शैली और गतिविधियों में बाधा डालने लगी हैl
  8. अगर आपको छाती में दर्द के साथ साथ गर्दन जबड़े टांगो या बाजू आदि में दर्द महसूस हो रहा है दर्द के साथ साथ अगर आपको सांस लेने में कठिनाई कमजोरी नाडी अनियमित होना या पसीने आने से समस्याएं हैंl
  9. अगर आपको अत्यधिक पेट में दर्द है अगर आप को दस्त की समस्या है या काले रंग का मल आता है या मल में खून आता हैl

एसिडिटी के कारण :-

  1. एसिडिटी या पेट में जलन क्यों होती है? हर किसी को कभी ना कभी एसिडिटी की  समस्या होती है आमतौर से यह खान-पान से जुड़ी होती है l
  2. गर्भावस्था में भी एसिडिटी रिफ्लेक्स हो जाता है क्योंकि इस दौरान अंदरूनी अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता हैl गर्भावस्था में अधिक खाने की वजह से भी एसिडिटी हो जाती है l
  3. अधिक तले हुए खाद्य पदार्थ भी एसिडिटी का कारण बन सकते हैं ज्यादा तला हुआ खाना खाने से भी पेट की समस्या हो सकती है l तला हुआ खाना पचने में ज्यादा समय लगाता है और पेट में अधिक देर तक रहता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह सा भोजन को आंतों तक जाने की गति को धीमा कर देती है इससे पेट में अम्ल बनने लगता है और एसिडिटी हो जाती है l
  4. अन्य जोखिम कारक
  1. मोटापा,
  2. धूम्रपान दूसरे व्यक्ति द्वारा किया गया धूम्रपान के संपर्क में आने से,
  3. नमक का अत्यधिक सेवन ,
  4. फाइबर युक्त आहार का कम सेवन,
  5. शारीरिक व्यायाम में कमी,
  6. कुछ दवाएं जिनमें मुख्य रूप से अस्थमा की दवाइया,  दर्द निवारक,रिलेटिव और एंटीडिप्रेसेंट की दवाएं शामिल हैं,
  7. शराब या कैफीन युक्त पदार्थ पीना,
  8. जरूरत से ज्यादा भोजन करना या सोने से तुरंत पहले खाना ज्यादा खाने से पेट में ज्यादा बनने लगता है और एसिडिटी हो जाती है

एसिडिटी से बचाव :- एसिडिटी होने से कैसे रोके ?कुछ खाद्य पदार्थों और खाने की आदतों में बदलाव लाकर एसिडिटी होने से रोका जा सकता है एसिडिटी रोकने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं l

  1. अधिक से अधिक फल और सब्जियों का सेवन करें l
  2. एक बार खाने की बजाय थोड़ा-थोड़ा भोजन कई बार करेंl
  3. रात को सोने से करीब 1 से 2 घंटा पहले भोजन करना l
  4. शरीर का स्वस्थ वजन बनाए रखना व्यायाम करना 1 दिन में करीब 3 लीटर से ज्यादा पानी पीनाl
  5. खाना खाने से 30 मिनट पहले और खाना खाने के 1 घंटे बाद तक पानी ना पीना l
  6. टाइट बेल्ट और कपड़े नहीं पहनना चाहिए l

एसिडिटी का परीक्षण :- आमतौर पर जीवनशैली में बदलाव और एसिडिटी की दवाई देने के बाद सीने  में जलन के लक्षणों में किसी प्रकार का सुधार ना होता देख कर इसका निदान हो सकता है l एसिडिटी और सीने में जलन सामान्य समस्या है और उनका निदान करना भी काफी आसान होता है l हालांकि कई बार इनके कारण निमोनिया, दिल का दौरा और अन्य साँस  संबंधी समस्याओं का भी हो सकता है निम्न प्रकार की जांच करने की आवश्यकता हो सकती हैl

  1. एंडोस्कोपी विशेष प्रकार के कैमरे से तस्वीर लेना
  2. बायोप्सी
  3. बेरियम एक्स रे
  4. एसोफगस मैनोमीटर इंसीडेंस मॉनिटरिंग

एसिडिटी का इलाज:- पेट में जलन (एसिडिटी) के उपचार में अक्सर जीवनशैली में बदलाव ,दवाई  और बहुत ही कम मामलों में सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ती है l उसके उपचार का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को कम करना है जीवन की गुणवत्ता को सुधारना है, इसको ठीक करना है और किसी भी प्रकार की जटिलताओं से बचाव करना l दवाई साधारणतः एंटी एसिड यह दवाई केमिस्ट के यहां मिलती हैं यह दवाई कभी कभी यह होने वाली एसिडिटी की समस्या को नियंत्रित करने के लिए काफी होती है l यह दवाई पेट में बने अम्ल को बेअसर करने का काम करती हैंl अम्ल कम करने वाली दवाई आपके पेट में बनने वाले अम्ल की मात्रा में कमी करता है lइसके  के लिए मुख्य रूप से दो दवाओं का प्रयोग किया जाता है यह दवाई लक्षणों को कम करती हैंl इन दवाओं में प्रोटोन पंप इनहीटर, हिस्टामिन टू रिसेप्टर एंटागनिस्ट, प्रोकाइनेटिक एजेंट्स lसर्जरी उपरोक्त चारों से किसी प्रकार की मदद ना मिलने या उनके कारण कोई साइड इफेक्ट होने पर सर्जरी विकल्प हो सकता हैl

जीवनशैली में बदलाव:- एसिडिटी के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आप पोषण के साथ-साथ  जीवन शैली में कुछ बदलाव करके भी इसके लक्षणों को मैनेज कर सकते हैं और अम्ल के उत्पादन में कमी करने के लिए एंटी एसिड व अन्य प्रकार की दवाई देना, चिंगम चबाना लेकिन वह पिपरमिंट फ्लेवर वाली नहीं होनी चाहिए l खाना खाने के करीब 2 घंटे बाद तक लेटे नहीं बिस्तर पर जाने से पहले 3 घंटे पहले खाना खा ले, जरूरत से अधिक मात्रा में भोजन ना करें, एक बार में पेट भर कर खाने की बजाय थोड़ी थोड़ी मात्रा में कई बार खा लेना एसिडिटी के लक्षणों को कम करने का अच्छा तरीका है l सोते समय अपने सिर की तरफ को पैरों की तुलना में ऊंचाई पर रखने से एसिडिटी के लक्षणों की कमी की जा सकती हैl

एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए :- सूखे मेवे जैसे मूंगफली और मीठी चीजें जैसे चीनी शहद कुछ प्रकार के मसाले , सिरका ,हरी मिर्च ,काली मिर्च, दालचीनी संसाधित खाद्य पदार्थ और संसाधित पनीर, साबुत दाल ,शराब, गैस से भरे हुए पदार्थ कैफ़ीन वाले जैसे चाय और कॉफी नींबू और संतरा आदि l

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए :- सब्जियां जैसे हरी बींस ब्रोकली गोभी हरी पत्तेदार सब्जियां आलू जीरा अदरक दलिया पर जो खट्टे ना हो जैसे खरबूज केला सेब नाशपाती आदि अंडे का सफेद भाग स्वास्थ्यवर्धक वसा के स्रोत हैं सन के बीच जैतून का तेल और सूरजमुखी का तेलl

क्या नियमित व्यायाम कैंसर की संभावना को कम करता है ?

एरोबिक व्यायाम वह व्यायाम है जिसके लिए शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए शरीर को बहुत तेजी से रक्त पंप करना पड़ता है। एरोबिक व्यायाम में दौड़ना, नृत्य, तैराकी और लंबी पैदल यात्रा आदि शामिल हैं।

Cancer Epidemiology, Biomarkers and Prevention नामक पत्रिका ने हाल ही में एक अध्ययन किया कि दैनिक व्यायाम (daily exercise)  स्तन कैंसर होने के जोखिम को कैसे कम करता है। जिस प्रकार के व्यायाम (exercise) ने विशेष रूप से स्तन कैंसर को रोकने में मदद की, वह एरोबिक व्यायाम था। एरोबिक व्यायाम वह व्यायाम है जिसके लिए शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए शरीर को बहुत तेजी से रक्त पंप करना पड़ता है। एरोबिक व्यायाम में दौड़ना, नृत्य, तैराकी और लंबी पैदल यात्रा  आदि शामिल हैं।

एरोबिक व्यायाम  केवल कैंसर के जोखिम को ही कम नहीं करता है बल्कि  यह आपके टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोग की संभावना को  भी कम करता है। व्यायाम करने से इन बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। उच्च इंसुलिन का स्तर और शरीर में वसा की उच्च मात्रा इन बीमारियों को उत्पन्न  करने वाले   जोखिमो  के महत्वपूर्ण संकेत हैं। व्यायाम आपके रक्त शर्करा को कम करता है और आपको वजन कम करने में मदद करता है जिससे ये जोखिम कारक कम हो जाते हैं।

व्यायाम आपके रोगों के जोखिम को न केवल कम करता है बल्कि यह आपके जीवन को लम्बा करने में भी मदद है! शोध से पता चलता है कि जो वयस्क रोजाना 9 घंटे या उससे अधिक समय तक बैठ कर काम करते  हैं उनकी तुलना में किसी भी तरह की सक्रिय  गतिविधि में भाग लेने वाले लोगों में अधिक लंबा जीवन होने की संभावना होती  है। लगातार सक्रियता  आपकी शरीर  की मांसपेशियों को स्वस्थ रखता है और आपके शारीर को आकार में बने रहने में मदद करने के साथ ही शरीर के  रक्त परिसंचरण में सुधार करता है!

स्वस्थ एवं संतुलित आहार बनाए रखने से भी बीमारी को रोकने में मदद मिल सकती है। डॉक्टर एक संतुलित आहार का सेवन  करने की सलाह देते हैं जिसमें स्वस्थ रहने के लिए सब्जियां, फलियां, साबुत अनाज और समुद्री भोजन शामिल हैं। संतुलित  आहार का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है कि यह कैंसर के खतरे को कम करता है, लेकिन संतुलित आहार से मोटापा कम होता है जो कैंसर का एक बड़ा कारण है। हालांकि, ब्रोकोली, फूलगोभी,  स्क्वैश, गाजर, और पालक जैसी सब्जियां खाने से स्तन कैंसर का खतरा कम होता है। आहार विशेषज्ञ भोजन में फास्ट फूड, मीठा पेय और प्रोसेस्ड मीट कम करने की सलाह देते  हैं क्योंकि वे आपके मोटापे के खतरे को बढ़ा सकते हैं जिससे कैंसर हो सकता है। रेड मीट की बजाय प्रोटीन के लिए चिकन, सीफूड और फलियां खाने वाले बच्चों को कैंसर होने की संभावना भी कम होती है।

आहार विशेषज्ञ बीमारी से बचाव के लिए और शरीर में पोषक तत्वों के स्तर को बनाये रखने के लिए अनावश्यक  पोषक तत्वों के  सप्लीमेंट्स से दूर रहने की सलाह देते हैं और इसके बजाय उन पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते  हैं.

Can Exercising Reduce your Risk for Disease?

There is a strong positive relation between oral glucose tolerance test and different lungs capacity and exercise.Exercise positively effect oral glucose tolerance and increases all lungs capacity which ultimately reduces the risk of diabetes and lungs diseases.

Exercise Physiology

The journal, Cancer Epidemiology, Biomarkers and Prevention,recently performed a study on how daily exercise correlates with a reduced
risk of getting breast cancer. The type of workout that specifically helped to prevent
breast cancer was aerobic exercise. Aerobic exercise is exercise that requires
the body to pump blood much faster to get enough oxygen to the body. Aerobic
exercises include running, dancing, swimming, and hiking.

But aerobic exercise doesn’t just lower your risk of cancer,
it also lowers your likelihood of type 2 diabetes and heart disease. Exercising
can help reduce the risk of these illnesses because high insulin levels and
high amounts of body fat are significant signs of risk for contracting these
diseases. Exercises lowers your blood glucose and helps you lose weight which
makes these risk factors less of an issue.

Not only can exercise reduce your risk of disease but it can
also prolong your…

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Don’t Let the Passion Fade away with your busy Life

divyasing

I am Divya Singh from Allahabad. I am a post graduate with an M. Pharma. I have my small business of pharmacy. I have an interest in writing from my childhood. I have not taken it seriously ever in my life. But after my PG I got a placement in one of the MNC company of Gurgaon (now known as Gurugram) where I initially got the position of Medical Content Writer. That company was an IT E- commerce firm which deal with medicine. My passion has become my job, that was amazing for me and I got hooked with my work. I learned how to write blogs, articles, press release and meta description for the sites. I started enjoying my work. Even it pushed up me to learn more and more. I started learning SEO, maintaining websites, participating in more and more forums, dashboards and scoring points. I started taking…

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Take Care When You Dehydrate

divyasing

Mild to moderate dehydration may include the following signs and symptoms-

  • 1. Increased thirst.
  • 2.Dry mouth.
  • 3.Tired or sleepy.
  • 4.Decreased urine output.
  • 5.Urine is low volume and more yellowish than normal.
  • 5.Headache.
  • 6.Dry skin.
  • 7.Dizziness

Treatment-
1.By ORS like electrol powder
2.By i.v. fluid like DNS or Ringer lactate

-If any one filling symptoms of above then it may be possible that he/she is suffering from dehydration.
-Take a sachet of ORS and it mixed in a 1000ml of water and take this solution orally.
-Treat the cause of dehydration.

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दिल की देखभाल कैसे करे .

स्वस्थ ह्रदय एक स्वस्थ शरीर का आधार होता है इसलिए शरीर को स्वस्थ होने के लिए ह्रदय का स्वस्थ होना अतिअवाश्यक होता है l ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए खानपान के साथ साथ ब्यायाम और जीवनशैली में सुधार करना बहुत जरुरी है । आजकल की भागदौड़ और तनावयुक्त  जिंदगी में हृदय संबंधी रोगों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है l कुछ आवश्यक बातो पर ध्यान देकर ह्रदय सम्बन्धी विकारो से बचा जा सकता है

1.नियमित व्यायाम

हृदय की मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम बहुत जरूरी है। इससे हृदय की मांसपेशिया तो मजबूत होने के साथ ही  धड़कन प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है, साथ ही शरीर में  रक्त का प्रवाह बना रहता है जिससे शरीर को  आसानी से ऑक्सीजन प्राप्त होता है, जिससे आपकी कार्यक्षमता बढ़ती है और ताकत मिलती है। कभी भी अपने शरीर पर अत्यधिक भार मत लें। अगर आपको कुछ समय के लिए थकावट महसूस हो रही है तो कार्य शुरू करने से पहले शरीर को 15 मिनट का आराम दें। जिससे आपकी कार्यशक्ति वापस बढ़ सके।

2.धूम्रपान और अल्कोहल छोड़ें

धूम्रपान और अल्कोहल करने वाले व्यक्तियों में दिल का दौरा या आकस्मिक हृदय रोग से मृत्यु होने की संभावना आम व्यक्तियों की तुलना में दुगुनी होती है। धूम्रपान छोड़ देने के 10 वर्षो के अंदर इन बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। तो आप अभी से ही धूम्रपान से मुक्त होने के लिए कदम क्यों नहीं उठातीं।

3.वजन पर करें नियंत्रण

ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए वजन का नियंत्रण आवश्यक है ,मोटे लोगो में ह्रदय रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है lयदि आपका वजन अधिक है तो आपके हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसे शरीर में रक्त के प्रवाह को बनाये रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है जिसके लिए उसे जोर  से धड़कना पड़ता है। अधिक वजन का कारण असंतुलित भोजन और व्यायाम की कमी है, जिससे कई अन्य रोग भी जन्म लेते हैं। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, ताजे फल, हरी सब्जियां, संतुलित भोजन का सेवन और नियमित व्यायाम।

 4.वसा के प्रयोग में कमी करे

वसा का कम से कम प्रयोग हृदय को कई रोगों से बचाता है। रक्त में कोलेस्ट्रोल बढ़ने से रक्तवाहिनियो में एथिरोस्क्लिरोसिस हो जाती है जो हृदय में रक्त के प्रवाह को कम करती है lह्रदय को शरीर में प्रवाह बनाये रखने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है l अगर आप शुरू से ही कम वसा के इस्तेमाल का नियम बना लें तो हृदय संबंधी गंभीर रोगों से बचाव कर सकते है l पशुओं से प्राप्त पदार्थो जैसे मांस, मक्खन, चीज में वसा अधिक पाई जाती है, साथ ही पकाए गए बिस्कुट या केक में भी यह अधिक होता है। इनसे शरीर में कोलस्ट्रॉल की मात्रा तो बढ़ती  है l

5.तनाव से बचे

तनावग्रस्त रहना स्वस्थ जीवन का शत्रु  है। कल्पना कीजिए जैसे कि आप अत्यधिक चीजों को एकसाथ नहीं संभाल पाते हैं वैसी ही स्थिति आपके हृदय के साथ भी हो सकती है। रोज का अत्यधिक तनाव ब्लड प्रेशर को तो बढ़ाता ही  है  साथ ही साथ यह हृदय की मांसपेशियों को भी प्रभावित करता है। इसलिए तनावमुक्त रहने का प्रयत्‍‌न करें, पर्याप्त नींद लें और साथ ही आराम के लिए भी समय रखें। तनाव से बचने के लिए ध्यान करें, यह आपके लिए लाभदायक होगा।

6.भोजन में फल और मछली का इस्तेमाल करे

स्वस्थ हृदय के लिए जरूरी है कि रोज आपके भोजन में कम से कम पांच प्रोटीनयुक्त फल और सब्जियां हों। ये विटामिन व प्रोटीनयुक्त होते हैं जो कि एलडीएल को कम करने में सहायक होते हैं तथा कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं। हृदय को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए सभी आवश्यक तत्व फलों में होते हैं। इसलिए फलाहार जरूर करें। ट्राउट, सालमन या टुना जैसी ऑयली मछली में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 के जरूरी तत्व होते हैं, जो कि कोरोनरी हृदय रोग के लिए दिए जाते हैं और ये रक्त के थक्के बनने से रोकथाम में मदद करता है। 

7. कम करें नमक का सेवन

शरीर में सोडियम की मात्रा सही अनुपात में बनाएं रखने के लिए भोजन में नमक की कुछ मात्रा होना जरूरी है, पर ज्यादा तेज नमक हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का कारण भी बन सकता है। अपने भोजन में ज्यादा नमक न लें और ज्यादा नमकीन नाश्तों का सेवन भी कम करें। पोटेशियम के लिए फल व सब्जियां अच्छे स्त्रोत हैं जो प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में सोडियम की मात्रा बनाए रखने में सहायक होते हैं।